कम्प्यूटर का परिचय

परिचय

'कम्प्यूटर' शब्द की उत्पत्ति लैटिन (Latin) भाषा के 'कम्प्यूटेयर' (Computare) शब्द से हुई है, जिसका अर्थ गणना करना है| अन्य शब्दों में, कम्प्यूटर ऐसी मशीन है , जो गणनाएँ करने में हमारी सहायता करती है, इसलिए इसे 'संगणक' भी कहा जाता है|
वर्तमान में इसका कार्यक्षेत्र बहुत अधिक विस्तृत और व्यापक हो चुका है| इसकी क्षमताओं और विशेषताओं को देखकर इसका नाम कम्प्यूटर ही प्रचलित हो गया|

कम्प्यूटर क्या है ?

कम्प्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है, जिसमें डाटा को प्राप्त, प्रोसेस, संगृहीत अथवा प्रदर्शित करने की क्षमता होती है| कम्प्यूटर हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का ऐसा संयोजन है, जो डाटा (Data) को सूचना (Information) में परिवर्तित करता है |

कम्प्यूटर शब्दावली में प्रयोग होने वाली कुछ टर्म निम्न प्रकार हैं

1. डाटा (Data) यह तथ्यों तथा सूचनाओं का अव्यवस्थित समूह होता है; जैसे- नम्बर टैक्स्ट आदि|
2. प्रोसेसिंग (Processing) यह सूचना में परिवर्तित करने के लिए डाटा पर किए गए कार्यों का क्रम है|
3. सूचना (Information) जब डाटा को उपयोगी बनाने के लिए इसे व्यवस्थित, संगठित तथा संचारित (Transmitted) किया जाता है, तब प्राप्त डाटा सूचना कहलाती है|
4. निर्देश (Instruction) यह यूजर द्वारा कम्प्यूटर लैंग्वेज में कम्प्यूटर को दिए गए कमाण्ड्स हैं|
5. प्रोग्राम (Program) यह निर्देशों का समूह होता है, जो कार्य करने के क्रम में कम्प्यूटर को दिए जाते हैं|

कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ

कम्प्यूटर के अध्ययन में कम्प्यूटर की पीढ़ियों से तात्पर्य है 'कम्प्यूटर तकनीक में वृद्धि'| वस्तुतः पीढ़ियाँ कम्प्यूटर के विकास का समयानुसार वर्णन करती हैं|
बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्माण प्रारम्भ हो चुका था| इस तकनीक पर आधारित प्रथम पीढ़ी के कम्प्यूटर के निर्माण का प्रयास सन 1930 के दशक के अंत में जॉन वीo एटनासोफ द्वारा किया गया| सन 1946 में प्रथम इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, वैक्यूम ट्यूब (Vacuum tube) युक्त एनिएक (ENIAC) कम्प्यूटर जॉन मुचली एवं जेo प्रेस्पर एकर्ट द्वारा बनाया गया जिसने कम्प्यूटर के विकास को एक सशक्त आधार प्रदान किया| कम्प्यूटर के विकास के इस क्रम में कई महत्वपूर्ण उपकरणों की सहायता से कम्प्यूटर ने वर्तमान तक की यात्रा की| प्रत्येक कम्प्यूटर के मूलभूत सिद्धान्त व उसके भाग के नवीन रूप में विकसित होने पर एक नई पीढ़ी का प्रारम्भ होता है| इस विकास के क्रम को हम पाँच पीढ़ियों में बाट सकते हैं-

  • पहली पीढ़ी (First Generation) - सन् 1946 से 1956 तक
  • दूसरी पीढ़ी (Second Generation) - सन् 1956 से 1964 तक
  • तीसरी पीढ़ी (Third Generation) - सन् 1964 से 1971 तक
  • चौथी पीढ़ी (Fourth Generation) - सन् 1971 से वर्तमान तक
  • पाँचवी पीढ़ी (Fifth Generation) - वर्तमान से भविष्य तक

कम्प्यूटर्स की पहली पीढ़ी

सन् 1946 में एनिएक नामक कम्प्यूटर के पदार्पण से कम्प्यूटर की पहली पीढ़ी का प्रारम्भ हो गया| इसका भार 30 मीट्रिक टन था तथा इसमें 18,000 से अधिक वैक्यूम ट्यूब्स का उपयोग हुआ था| इन वैक्यूम ट्यूब्स का निर्माण सन् 1904 में हुआ था| इस पीढ़ी में एनिएक के कुछ समय पश्चात अन्य कम्प्यूटर; जैसे- एडवैक (EDVAC- Electronic Discrete Variable Automatic Computer), यूनिवैक (UNIVAC- Universal Automatic Computer) तथा यूनिवैक-I (UNIVAC-I) का निर्माण हुआ|

पहली पीढ़ी के कम्प्यूटर्स की विशेषताएँ निम्नलिखित थीं-

(i) इनमें वैक्यूम ट्यूब का प्रयोग होता था| वैक्यूम ट्यूब का आकार बड़ा होने के कारण इनसे बने कम्प्यूटरों का आकार बड़ा होता था| ये गर्म भी शीघ्र होते थे, इसलिए वातानुकूलन (airconditioning) की व्यवस्था भी रखनी पड़ती थी|
(ii) पंचकार्ड पर आधारित थे जिसके कारण इनका इनपुट/आउटपुट अत्यधिक धीमा था|
(iii) आन्तरिक स्मृति के रूप में मैग्नेटिक ड्रम प्रयोग किए जाते थे|
(iv) कम्प्यूटर अतिसंवेदनशील तथा अविश्वसनीय थे|
(v) प्रथम पीढ़ी के कम्प्यूटरों में दो कम्प्यूटर भाषाएँ प्रचलित थीं- (1) मशीन भाषा तथा (2) असेम्बली भाषा|

कम्प्यूटर्स की दूसरी पीढ़ी

सन् 1950 के आस-पास कम्प्यूटर के हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेयर के निर्माण एवं विकास में तीव्रता आई| सन् 1947 में बेल लेबोरेटरी के विलियम शॉकले (William Shockley) द्वारा आविष्कृत ट्रान्जिस्टरों ने वैक्यूम ट्यूब का स्थान ले लिया| दूसरी पीढ़ी के कम्प्यूटर ट्रान्जिस्टर पर आधारित थे| ट्रान्जिस्टर के उपयोग ने कम्प्यूटर्स को वैक्यूम ट्यूब के अपेक्षाकृत अधिक गति एवं विश्वसनीयता प्रदान की|

दूसरी पीढ़ी के कम्प्यूटर्स की विषेशताएँ निम्नलिखित थी-

(i) इस पीढ़ी के कम्प्यूटर वैक्यूम ट्यूब के स्थान पर ट्रान्जिस्टर पर आधारित थे| इस कारण इनका आकार अपेक्षाकृत छोटा था तथा साथ ही ये कम विद्युत व्यय करते थे|
(ii) इनमें तापमान की समस्या भी बहुत सीमा तक कम हो गई थी|
(iii) ये अधिक विश्वसनीय थे|
(iv) इनके छोटे आकार के कारण इन्टर्नल मैमोरी को भी बढ़ाया जा सका, कार्यगति भी बढ़ी तथा साथ ही इनपुट-आउटपुट प्रोसेसिंग भी कुछ तीव्र हुई|
(v) उच्चस्तरीय भाषाओं; जैसे COBOL तथा FORTRAN का विकास हुआ|

कम्प्यूटर्स की तीसरी पीढ़ी

सन् 1964 में वाणिज्यिक रूप से उपलब्ध इन्टीग्रेटेड सर्किट (ICs) के उपयोग के साथ तीसरी पीढ़ी का शुभारम्भ हुआ| IC तकनीक से कम्प्यूटर्स का आकार और छोटा हुआ| इस तकनीक का आविष्कार टेक्सास इंस्ट्रूमेंट कम्पनी (Texas Instrument Company) के एक इंजीनियर जैक किल्बी ने किया था| इस पीढ़ी के कम्प्यूटर्स में ICL 1900, ICL 2903, यूनिवैक 1108 तथा System 360 प्रमुख थे|

तीसरी पीढ़ी के कम्प्यूटर्स की विषेशताएँ निम्नलिखित थीं-

(i) इस पीढ़ी के कम्प्यूटर्स में इन्टीग्रेटेड सर्किट का प्रयोग हुआ जिस कारण इनका आकार अधिक छोटा हो गया तथा इनका भार भी बहुत कम हो गया|
(ii) ये अधिक विश्वसनीय थे|
(iii) इस पीढ़ी के कम्प्यूटर्स का रख-रखाव अत्यन्त सरल था| इन्हें वातानुकूलन की आवश्यकता नहीं होती थी|
(iv) उच्चस्तरीय भाषाओं का बड़े पैमाने पर प्रयोग हुआ|

कम्प्यूटर्स की चौथी पीढ़ी

सन् 1971 से वर्तमान तक का समय कम्प्यूटर्स की चौथी पीढ़ी को दिया गया है| कम्प्यूटर्स की चौथी पीढ़ी में इन्टीग्रेटेड सर्किट को और अधिक विकसित किया गया जिसे 'लार्ज इन्टीग्रेटेड सर्किट' (Large Integrated Circuit) कहा जाता है| वर्तमान में इस तकनीक से 30,000 ट्रांजिस्टर्स के तुल्य परिपथ को एक-चौथाई इंच में समाहित किया जा सकता है| इस तकनीक से कम्प्यूटर बनाने की लागत और भी कम हुई है तथा कम्प्यूटर का आकार भी बहुत छोटा हो गया है| वर्तमान में सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (सीo पीo यूo), मैमोरी तथा इनपुट-आउटपुट सर्किट को एक अथवा एक से अधिक इन्टीग्रेटेड सर्किट में सम्मिलित किया गया जिसे माइक्रोप्रोसेसर कहते हैं तथा इन पर आधारित कम्प्यूटर को माइक्रोकम्प्यूटर कहते हैं| इस तकनीक ने सामान्य उपयोग के कम्प्यूटर्स की एक नई श्रेणी अर्थात चौथी पीढ़ी का प्रादुर्भाव किया| पीo सीo अर्थात पर्सनल कम्प्यूटर इसी पीढ़ी के कम्प्यूटर को कहते हैं|
पहला पर्सनल कम्प्यूटर ALTAIR 8800 सन् 1971 के मध्य में उपलब्ध हुआ जिसे MITS नामक कम्पनी ने बनाया था| MITS का यह ALTAIR कम्प्यूटर Intel 8800 माइक्रोप्रोसेसर पर आधारित था| परन्तु सन् 1981 में उपलब्ध IBM के कम्प्यूटर्स की श्रृंखला सबसे सफल रही है| इसके बाद IBM के कम्प्यूटर्स को मानक रूप में जाना जाने लगा| इसी के साथ कई अन्य निर्माता भी इसी प्रकार के कम्प्यूटर्स का निर्माण करने लगे| IBM कम्पनी के कम्प्यूटर Intel Corp. द्वारा निर्मित माइक्रोप्रोसेसर पर आधारित थे|
इस श्रृंखला का पहला माइक्रोप्रोसेसर 8086 सन् 1978 में उपलब्ध हुआ| तत्पश्चात 80286 (1983), 80386 (1986), 80486 (1986), पेन्टियम (1993), पेन्टियम II (1997), पेन्टियम III (1999), पेन्टियम IV (2000) में उपलब्ध हुए| इनके अतिरिक्त एक और निर्माता 'एप्पल कम्प्यूटर्स' (Apple Computers) के उत्पाद भी लोकप्रिय हुए|
चौथी पीढ़ी के प्रथम माइक्रोकम्प्यूटर ALTAIR 8800 पर हावर्ड विश्वविद्यालय के एक छात्र बिल गेट्स ने बेसिक भाषा को स्थापित किया| इस सफल प्रयास के पश्चात् बिल गेट्स ने माइक्रोसॉफ्ट कम्पनी की स्थापना की जो संसार में सॉफ्टवेयर निर्माण की सबसे बड़ी कम्पनी है| इस कारण, बिल गेट्स को संसार-भर में कम्प्यूटर का स्वामी (Owner of Computers) कहा जाता है|

कम्प्यूटर्स की पाँचवी पीढ़ी

कम्प्यूटर्स की पाँचवी पीढ़ी के अन्तर्गत वर्तमान तथा भविष्य के कम्प्यूटर्स को रखा गया है| इस पीढ़ी के कम्प्यूटर्स के बारे में विस्तार से चर्चा करना सम्भव नहीं हैं; क्योकि इसके अन्तर्गत भविष्य में आने वाली अत्यधिक एडवांस तकनीक पर आधारित कम्प्यूटर्स आते है जिनके बारे में निश्चित तौर पर कुछ बताना सम्भव नहीं है| यद्यपि कम्प्यूटर विशेष इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) पर विचार कर रहे हैं| ऐसा होने पर कम्प्यूटर तार्किक हो जाएँगे|
इस पीढ़ी के कम्प्यूटर्स में नेटवर्क के विकास की बहुत अधिक सम्भावनाएँ हैं| अनेक जटिल-तकनीक वाले क्षेत्रों में इस पीढ़ी के कम्प्यूटर्स से बहुत सी अपेक्षाएँ हैं| Next

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